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हिंदू हिन्दी हिंदुस्तान

Posted by Nirbhay Jain Saturday, September 12, 2009, under | 0 comments
हिंदू हिन्दी हिंदुस्तान
क्या है भारत की पहचान
पहले राज किया अंग्रेजों ने
अब अंग्रेजी के है गुलाम

देश की आजादी की खातिर
जाने कितनों ने देदी जान
हिन्दी को हम भूल रहे है
अंग्रेजी को समझते शान

हिन्दी बचाओ के नारे लगाकर
चला देते हैं हम अभियान
हालत क्या है हिन्दी की
इस ओर नहीं है किसी का ध्यान

अब सब कुछ हिन्दी में होगा
कहते नेताजी सीना तान
ख़ुद विदेशी दौरे कर रहे
छोड़ रहे है अंग्रेज़ी वाण

उर्दू के खातिर जिन्ना ने
बना दिया था पकिस्तान
हिन्दी को हिंगलिश बनाकर
बोल रहा है हिंदुस्तान
हिंदू हिन्दी .............

विनती सुनलो मातृभूमि की
ऐ भारत माँ के वीर जवान
हिन्दी दिवस मनाने से ही
नहीं बनेगी देश की पहचान
हिंदू हिन्दी .............

हिन्दी आवश्यक भाषा है
सबको सुना दो ये फरमान
तभी होगा एक ये भारत
हिंदू हिन्दी हिंदुस्तान

कुछ लिखना है कुछ कहना है

Posted by Nirbhay Jain Monday, September 7, 2009, under | 1 comments
कुछ लिखना है कुछ कहना है
पर शब्द नहीं मिल पाते है
कलम हाथ में लेकर भी
हम कुछ भी लिख न पाते है

कुछ जहन में है कुछ दिल में है
फ़िर भी कुछ कह नही पाते है
मिलने की कोशिश करते है
पर उनसे मिल नही पाते है

कुछ सोच लिया कुछ बोल दिया
वो कुछ न समझ पाते है
हम कोशिश करते रहते है
वो किसी और से मिलने जाते है

कुछ ठेस लगी कुछ घाव हुए
पर दवा लगा नही पाते है
ऐसे जख्मो पर तो शायद
हकीम भी काम ना आते है

कुछ मजनू थे कुछ राँझा थे
हम कौन है समझ न पाते है
एकतरफा चाहने वालो को
सब पागल पागल बुलाते है

चम्पतिया आ गयी, चम्पतिया

Posted by Nirbhay Jain Tuesday, August 25, 2009, under , | 2 comments
छोटी की घटना बड़ी हो गयी
मरी हुई एक बुढ़िया खड़ी हो गयी
उसे देखकर एक बूढा डर गया
थोडी देर बाद वो मर गया

लाश देखकर एक चिल्लाया
चम्पतिया आ गयी, चम्पतिया
मैंने पूछा ये चम्पतिया कौन है
वो बोला चम्पतिया को नही जानते
ये वही है जो कभी बिल्ली तो
कभी कुत्ता बन जाती है
कभी भूत बनकर लोगो को डराती है
अंधेरे का फायदा उठाकर
किसी को भी मार जाती है

मैं बोला ये क्या करते हो
क्यो इस बात से डरते हो
चम्पतिया का पता नही
ये तो कोरी बकबास है
एक बूढा जो निपट गया था
ये तो उसकी लाश है

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

Posted by Nirbhay Jain Wednesday, August 12, 2009, under | 2 comments

मचो गोकुल में है त्यौहार, भयो नन्द लाल
खुशिया छाई है अपरम्पार, भयो नन्द लाल

मात यशोदा का है दुलारा,
सबकी आँखों का है तारा
अपनों गोविन्द मदन गोपाल
......... भयो नन्द लाल

मात यशोदा झूम रही है
कृष्णा को वो चूम रही है
झूले पलना मदन गोपाल
......... भयो नन्द लाल

देख के उसकी भोली सुरतिया
बोल रही है सारी सखिया
कितनो सुंदर है मदन गोपाल
......... भयो नन्द लाल


-जय श्री कृष्णा

भारत प्यारा देश हमारा

Posted by Nirbhay Jain Tuesday, July 28, 2009, under | 3 comments
भारत प्यारा देश हमारा
सब देशों में सबसे न्यारा
हम सबका बस एक ही नारा
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा
भारत प्यारा... ..........

रहे सलामत गणतंत्र हमारा
बजे हमेशा लोकतंत्र का नगारा
कितना सुंदर कितना प्यारा
इससे से तो हर दुश्मन हारा
भारत प्यारा... ..........

ये बेचारा देश हमारा
नेताऒ के बोझ का मारा
इसे चाहिए युवाओं का सहारा
नेता मिले भगत, सुभाष सा प्यारा
भारत प्यारा... ..........

मिलजुलकर सब एक हो यारा
बस यही हो संकल्प हमारा
भारत माँ का बनो दुलारा
सबने
मिलकर यही पुकारा
भारत प्यारा... ..........

अब तो फांसी देदो जनाब

Posted by Nirbhay Jain Saturday, July 25, 2009, under | 0 comments
हां मैंने ही बरसाई मौत
चुप्पी तोड़ बोला कसाब
क़बूल कर लिया अपना गुनाह
अब तो फांसी देदो जनाब

बहुत खेल लिया मौत का खेल
अब नहीं रहना मुझको जेल
ऊपर जाकर देना है खुदा को
अपने कर्मो का हिसाब
अब तो फांसी देदो जनाब

अब मुझसे सहन नहीं होती
ये रोज रोज की रिमांड
बार बार इस पूछताछ से
हो गया है दिमाग ख़राब
अब तो फांसी देदो जनाब

जो कुछ था सब बता दिया है
अब क्या है मेरे पास

बहुत हो गई मुकदमा बाजी
बंद करो ये मेरी किताब
अब तो फांसी देदो जनाब

क़बूल कर लिया अपना गुनाह
अब तो फांसी देदो जनाब

एक मंत्र बस भारत होता

Posted by Nirbhay Jain Monday, July 20, 2009, under | 0 comments

तेरा मेरा कुछ होता, अब कुछ कितना अच्छा होता।
ये सब होता अपना सबका, कोई फिकर न कोई चिंता
एक मंत्र बस भारत होता, तो फ़िर कितना अच्छा होता।।

मेरी बोली तेरी भाषा, मेरा प्रान्त तुम्हारा क्षेत्र
मेरा वेश तुमहारी भूषा, मेरा धर्म तुम्हारी जाती
कोई कहता मेरा तेरा, तो फ़िर कितना अच्छा होता।।
एक मंत्र बस भारत होता, तो फ़िर कितना अच्छा होता।।

एक झण्डे के तले खड़े हो, एक राष्ट्र के प्रेम पगे हो
अपनी अपनी बान भुलाकर, आन पर जान लिये चले हो
एक साथ को अपने खुशियाँ, फ़िर कोई दुखी ना होता
एक मंत्र बस भारत होता, तो फ़िर कितना अच्छा होता।।

समीर में ज्यों गंध घुली हो, नीर क्षीर मिल मित्रता घनी हो
पानी की चंदन से प्रीति, संस्कृतियों की आस मिली हो
अरब दीप मिल बनते भानु, मिलजुल कर सब करना होता
एक मंत्र बस भारत होता, तो फ़िर कितना अच्छा होता।।

आनंद भर के देखिये

Posted by Nirbhay Jain , under | 1 comments
जिन्दगी के सफर में आनंद भर के देखिये
सर्जना में कल्पना के छंद भरके देखिये
खिल जाएँगे फिर रेत में संभावना के कमल
अपनी लगन की आप थोंडी गंध भर के देखिए
सारे दुश्मन आपके फिर दोस्त ही बन जाएँगे
प्यार का व्यवहार में मरकंद भर के देखिए
नफरतें इतनी मिलेंगी देश के इतिहास की
आप भूल से ही जयचंद बनके देखिए
सिर्फ घाटे ही मिलेंगे आजकल संबंध में
नए चलन में आप भी अनुबंध बनके देखिए
बहती नदिया कह रही है, जोहड़ों के कान में
आप प्रभु और भक्त का संबंध बनके देखिए।
खुद समंदर आप है, निर्बंध बनके देखिए
बेटा बेटी उम्रभर इज्जत करेगें आपकी
श्रम के आनंद में गुलकंद भरके देखिये

सच का सामना एपिसोड

Posted by Nirbhay Jain Sunday, July 19, 2009, under | 0 comments
विडियो देखने के लिए यंहा क्लिक करें
zSHARE video - sach1 16th july.wmv.flv

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सच का सामना का लाइ डिटेक्टर टेस्ट

Posted by Nirbhay Jain Saturday, July 18, 2009, under | 2 comments
मैं चाहता हूँ एक बार इसे जरूर आजमाए आपको भी पता चलना चाहिए की ऐसा क्या है इस धारावाहिक में जब तक आप इसे ठीक से नही देखेंगे तब तक इससे अनजान ही रहेंगे। कोई नही चाहता की उसका सच दुनिया के सामने आए। फ़िर भी कम से कम एक बार लाइ डिटेक्टर टेस्ट अवश्य दें .....................................
सच का सामना के लाइ डिटेक्टर टेस्ट के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - सच का सामना - स्टार प्लस

सच का सामना

Posted by Nirbhay Jain Thursday, July 16, 2009, under | 2 comments

जीवन की हर सच्चाई से
खबरदार हो जाइये
क्योकि शुरू हो गया है
स्टार पर सच का सामना

एक भोला सा बुद्धुराम
फस गया उनके जाल में
केबीसी जैसा शो होगा
उसने सोचा १५ की बजाये
२१ सवाल ही तो पूछेगें

झटपट उत्तर दे दूगां
हाँ / ना ही तो कहना है
करोड़पति बन गए तो ठीक
नही तो राजीव से ही मिल लेगें

बहुत कर चुका ये काम काज
अब तो टीवी पर दिखना है
यही सोचकर जा पंहुचा वो
करने 'सच का सामना '

पर ये क्या हो गया
पहला ही प्रश्न पूछ लिया
तुम्हारी दो पत्निया है
उसका दिमाग घूम गया
ज़माने से छुपाकर रखा जिसे
अब सब सामने गया
सच का सामना करने के लिए
हाँ कहना ही पड़ गया
और कोई चारा भी नही था
मन में बार बार ख्याल रहा था
मैं ये कहाँ गया
कार्यक्रम देखने वाले तो मज़े ले रहे है
और मैं यहाँ झूठ और सच में फंसा हुआ हूँ
एक करोड़ के लालच में सबके सामने नंगा खड़ा हूँ
पैसे तो नही कम पाउँगा
पर रिश्तो से जाऊंगा
जो जमा किए थे रिश्ते नाते
हाँ / ना मैं मिट जायेंगे

लाइ डिटेक्टर के फंदे में
फंस गया बुद्धुराम
एक सवाल के ही उत्तर में
याद गए राम
छोड़ के सब कुछ बोल पड़ा
नही करना मुझे सच का सामना
बहुत हो गया बहुत हो गया
मुझे माफ़ करना
रिश्ते बाकी रहे तो
फ़िर कभी करेगें
"सच का सामना"

आया सावन झूम के

Posted by Nirbhay Jain , under | 1 comments
धरती बोली अम्बर से
क्या करेगा मुझे चूम के
कुछ मेघ ही बर्षा दे
आया सावन झूम के

सावन में सब सुंदर सुंदर
झांक न मेरे मनके अन्दर
घुमड़ घुमड़ आजा अब तो
आया सावन झूम के

अब तो मानसून भी आया
प्यासी है ये मेरी काया
काया की ये प्यास बुझा दे
आया सावन झूम के

थक गए तेरी बात निहारत
इंतज़ार अब नही होता है
रस पावन सा टपका दे
आया सावन झूम के

ये कैसे तेरी लीला है
कहीं गीला कहीं सुखा है
अब तो नीर तो बरसा दे
आया सावन झूम के ......