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मेरे टूटे हुए दिल को, सहारा कौन देगा

Posted by Nirbhay Jain Friday, October 23, 2009, under | 0 comments
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मेरे टूटे हुए दिल को, सहारा कोन देगा
मेरी तूफ़ान में कश्ती, किनारा कोन देगा
यह केसे मोड़ पे लाइ हें, मुजको जिन्दिगानी
अधूरी सी लिखी गयी हँ, क्यूँ मेरी कहानी
हँ अब किस राह पे चलना, इशारा कोन देगा
मेरे टूटे हुए दिल को. सहारा कौन देगा
मैं हूँ और साथ मेरे, अब मेरी तन्हैया हैं
मेरी तकदीर से मुजको, मिली रुस्वयिया हैं
मेरी आँखों को खुशिओं का, नज़ारा कौन देगा
मेरे टूटे हुए दिल को, सहारा कौन देगा

पाँच दिनों का त्यौहार

Posted by Nirbhay Jain Thursday, October 15, 2009, under | 0 comments

चम चम करती दिवाली
घर घर दीपक जलते हैं
द्वार द्वार सजी रंगोली
रंग अनेक मन हरते हैं
उठती रसोई से सुगंध मनमोहक
लड्डू बर्फी बालूसाही
कितने पकवान कितनी मिठाई
फुलझडी की तड तड संग किलकारियां
फुवारों के संग चकरियां प्यारियां
वो देखो बदमाश हरा बम्ब लाया
कितने जोर का धमाका मचाया
मिलते लोगों से देते बधाई
हर मुख पर खुसी लहराई
चम चम करती लक्ष्मी
संग शारदा गणेश भी लायी
दर्दिरता, अज्ञान, विघ्न हरेंगे
अर्चित हो हम पर अनुग्रह करेंगे
उनके लिए दीप जलाओ
आनंदित हो घर सजाओ
एक मेरी थी प्यारी बेहेना
स्वर्ग में है, कोई उसको कहना
लक्ष्मी संग तुम भी आना
घर में पग फिर से धरना
आँखों से सूरत हटती नहीं
प्यारी अटखेलियाँ बिसरती नहीं
काश तुम संग हमारे होतीं
ऑंखें दीपो में रोतीं
इस्वर उसे सम्बहले रखना
स्वर्ग के सब प्राप्य वास्तु उसको देना.