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जीवन अधुरा सा लगता

Posted by Nirbhay Jain Thursday, October 1, 2009, under | 4 comments
आप अगर न आते मेरे जीवन मैं
ये जीवन अधूरा नजर आता हमें
कल तक जो अजनबी था मेरे लिए
आज उसी को दिल चाहता हे हर खुशी के लिए
कोई हे जो दुआ करता हे अपनों मैं
कुछ मीठे पल याद आते हे सपनो मैं
मन का पुलकित दीप समर्पित किया तुम्हें
आप हमेशा खुश रहो यही दुआ देते हे तुम्हें
आओ हम आपको आखो मैं छुपा ले
बेकरार दिल की धड़कन बना ले
तेरी हर अदा मोह्ह्बत सी लगती हे
जिन्दगी के हर लम्हे में आपकी जरुरत सी लगती हे
आपके जीवन में हमेशा खुशिया रहे
जीवन भर एक दुसरे का साथ रहे
एक पल भी तेरी जुदाई नहीं सहेंगे हम
आपसे बिछुड़कर एक पल जी न सकेंगे हम



आप अगर .................................................................

आज की नारी

Posted by Nirbhay Jain Sunday, September 6, 2009, under | 2 comments
आज की नारी जो है सबकी प्यारी
मात पिता की बड़ी दुलारी
घर में सुनती सबकी बारी बारी
फिर भी कितनी अकेली हे बेचारी

हर दम उसे ही करना होता बलिदान
अपनी खुशियों और सपनो का
सबकी रखती है वो लाज
होकर विदा जाती ससुराल
खाकर कसम कह देती वो
दुःख सुख में दूँगी पति का साथ

हर बार उसे ही देनी होती हे अग्नि परीक्षा
पति शादी के बाद देखे किसी और नारी की ओर
उसे कोई कुछ नही कहता पत्नी देखे किसी ओर की ओर
उसे सब कहते शर्म नही आती पति के होते हुए देखती हे
किसी ओर को एक नारी कहती हे दूसरी नारी से
क्यों ऑरत ही ऑरत की दुशमन हे
क्यों हे नारी लाचार
सब कुछ सहती गे पत्नी धर्म निभाती हे
परिवार को सुखी ओर खुशहाल बनती हे
सबकी खुशी का कह्यल रखती हे
पैर उसकी क्या खुशी हे ये कोई नही जानता
कितनी हे बेबस नारी
मैं आज की हर नारी से यही कहती हूँ
सभी रिश्ते निबाहो खुशी से
पैर अपनी भी कोई पहचान बनाओ
न जियो किसी की दम पर
खड़ी हो जाओ अपने अपने पैरो पर
छु लो अस्मा किसी से न रहो पीछे
हम क्या नही कर सकते मर्दों का हेर काम अब्ब हम भी हे करते
पर मर्द नही चला सकते हमरी तरह घर न ही बना सकते हे परिवार खुशहाल
अपने सपना न करो कुर्बान बनाओ अपनी अलग पहचान
कितनी हे बेबस नारी