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मेरा दिल करता है

Posted by Nirbhay Jain Friday, August 7, 2009, under | 1 comments
मेरा दिल करता हे की मैं भी चिडिया बन जाऊ
उपर आस्मां मैं उड़ जाऊ बदलो मैं छूप जाऊ
सबकी नजरो से छूप जाऊ किसी को नजर न आंऊ
अपने प्यारे से बचपन को याद करके खुश हो जाऊ

इस मतलबी दुनिया से दूर ही रहू
जादू करना सिख जाऊ छड़ी घुमाऊ और
अमीरों की तिजोरी से कुछ पैसा गरीबो को दे आऊं
मिलावट करने वालो को खूब रूलाऊ

अमृता जैन

आज की नारी कहा गई साड़ी

Posted by Nirbhay Jain Thursday, July 30, 2009, under | 0 comments
आज की नारी कहा गई साड़ी
छोर शर्म और पी रही पानी
कहते थे अबला जिसको हम
आज जाने कहा से आगया हें इसमे दम
आज की नारी ........................
पहनती हें मर्दों जेसे कपड़े
रोड पर करती हे झगडे
करती हे मन मानी
कहलाती हे कलयुग की रानी
आज की नारी ..............................
केसा आजकल का पहनावा हे
लड़को को ख़ुद देती बढावा हे
लड़के देखकर मरते हे सेटी
आखो मैं अ़ब नही शर्म का पानी
आज की नारी ...........