Posted by Nirbhay Jain
Wednesday, September 9, 2009, under
दीपक जोशी
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इस कदर हम पे हुआ था,
असर उसके प्यार कान ख़बर ख़ुद की थी हमको,
न होश था संसार काउसको न देखें तो दिल को चैन न मिलता कहींरोज ही हम ढूंढते थे बहाना दीदार काअब कहेंगे,
तब कहेंगे सोचते थे हर घड़ीआ सका न फिर भी हम को हौसला इज़हार काहमने माना उसको पाना काम ये आसन नहीइम्तेहान देना पड़ेगा हमको दरया पार काकहने को तो कह भी देते हाले दिल उनसे मगरडर हमे था सह न पाते दर्द हम इनकार काकरके हिम्मत एक दिन चले हम,
देर पर इतनी हुईगैर के हाथों में देखा हाथ उस दिन यार का
Posted by Nirbhay Jain
Friday, August 28, 2009, under
दीपक जोशी
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जबसे तुमको है अपना बनाये हुएहम तो अपनों से भी है पराये हुएन होना खफा तुम मेरे प्यार सेजी रहा हूँ तुम्हे दिल में बसाये हुएनजारों को शिकायत,
हम न देखे उन्हेंनज़रों में जो तुम हो समाये हुएमेरी चौखट पे रखोगी तुम कब कदमएक मुद्दत हुई घर सजाये हुएबढ़ रही है हर पल मेरी दीवानगीभड़क उठे न शोले दिल में दबाये हुएगर नही तुमको हमसे मुहब्बत सनमतोह बुझा दो यह “
दीपक”
जलाये हुए