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मेरी बर्बादी की दास्ताँ सुनाने से पहले

Posted by Nirbhay Jain Monday, August 31, 2009, under | 2 comments

मेरी बर्बादी की दास्ताँ सुनाने से पहले
मुझे इतना बता जाते चोर जाने से पहले
अगर कोई शिकवा तुमने मुझ से किया होता
मैं तुम को मन लेता रूठ जाने से पहले
तुम खुश नसीब हो हमने चाह है तुम्हें
वरना बोहत थे हम को चाहने वाले तुम से पहले
क्या मालूम था इतना तडपायेगी जुदाई तेरी
देखो तुम लौट आना यह जान जाने से पहले...!

देखा तो प्यार आया

Posted by Nirbhay Jain , under | 2 comments
पत्ता जो खड़का तो
दिल मेरा धड़का
दिल मेरा धड़का तो
शोला सा भड़का
देखा तो प्यार आया
दिल का करार आया
जन-ऐ-बहार आया
मस्ती मैं झूमे फिज़ा

आंखों मैं वो प्यार
जो दीवाना बनाये
महकी वो बहार
जो मस्ताना बनाये
घनी घनी जुल्फों मैं
झुकी झुकी पलकों मैं
राहों मैं गीत गूंजें
शाखों मैं फूल झूमें
कलियों ने पौन चूमें
क़दमों पे हो के फ़िदा

निगाहों से निगाहों का
छेड़ा हे फ़साना
ऐसे मैं मेरे सामने
आए न ज़माना
सजी सजी रहूँ मैं
खुली खुली बहूँ मैं
खुशियों की रात आई
दिल का शुरूर लायी
हाँ वो मुराद पाई
मांगी थी जो दुआ